आज उसे उसके हाल पर,
अकेला छोड़ आया हूँ |
ना चाहते हुए भी उससे,
मुंह मोड़ आया हूँ |
सदियों का रिश्ता जैसे,
पल-भर में छुट गया |
कितना अच्छा यार था मेरा,
वह मुझसे रूठ गया |
जिसके काँधे पर सिर रखकर,
कई बार मैंने रोया था...
आज उसे ही अकेला, रोता छोड़ आया हूँ |
आज उसे उसके हाल पर...
अकेला छोड़ आया हूँ |
हर दिन मुझे उठाता था वह,
जब मैं सोता रहता था...
मुझे दिलासा देता था वह,
जब मैं मायूस होता था |
कई बार उसने मेरी खातिर,
अपनी चाहत को कुर्बां किया |
जब मेरी बारी आई तब...
मैंने उससे मुंह मोड़ लिया |
वह भी सोचता होगा कि,
क्या खूब 'यार' मैं पाया हूँ...
आज उसे उसके हाल पर...
अकेला छोड़ आया हूँ |


