'ख़्वाब'

मैं ख्वाब देखता हूँ
और वो अचानक ही सामने आ जाती है।
चेहरे पर वही मुस्कान लिए
वो मुस्कान याद है न!
और मैं कहता हूँ...
अरे! बहना, कहाँ रही तुम?
और वो कुछ नहीं बताती
सिर्फ मुस्कुरा कर कहती है
कहती है... याद रखना!
मैं तुम्हे हमेशा चाहती रहूँगी भाई
मैं आज तुम्हे चाहती हूँ
और हमेशा चाहती रहूँगी
अलविदा नहीं कहूँगी,
सिर्फ प्यार दूंगी
क्योंकि...
मेरे दिल में बस प्यार है तुम्हारे लिए
और चली जाती है।
पर जाते हुए वो हुमेशा खुश रहती है
इसलिए मैं जानता हूँ कि वो जहाँ भी है,
वो ठीक है...
बिलकुल ठीक।