..☻..
जब भी अकेला होता हूँ, तो बाहें फैला देती है |
इक राह भूलने पर, कई राहें दिखला देती है |
जीवन के पथ पर भटक ना जाऊं
ऐसा जब-भी लगता माँ को, अपनी ऊँगली पकड़ा देती है |
इक राह भूलने पर, कई राहें दिखला देती है |
जीवन के पथ पर भटक ना जाऊं
ऐसा जब-भी लगता माँ को, अपनी ऊँगली पकड़ा देती है |
..☻..
जब भी मायूस होता हूँ, तो मेरी पीठ सहला देती है |
हौसला देती है वो मुझको, मेरा दिल बहला देती है |
जीवन के थपेड़ों से जब भी टूट जाता हूँ,
माँ उन्ही अंधेरों में, कई सपने दिखला देती है |
हौसला देती है वो मुझको, मेरा दिल बहला देती है |
जीवन के थपेड़ों से जब भी टूट जाता हूँ,
माँ उन्ही अंधेरों में, कई सपने दिखला देती है |
..☻..

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें