मैं तेरा हो नहीं पाया,
तू मुझको खो नहीं पाया...
बिछड़ कर यार मुझको भी,
अभी तक चैन ना आया...
करिश्मा है तेरा कैसा..??
तू मुझसे क्यों नहीं कहता ...
कि मीलों दूर होकर भी,
तू मुझमें है, यहीं रहता...
हर इक आहट बताती है,
कि अब भी याद आता हूँ...
रहूँ कैसे, कहीं पर भी,
मैं हर पल तुझको गाता हूँ...
ये रिश्ता है तेरा कैसा,
तू मुझसे क्यूँ नहीं कहता...
कि मीलों दूर होकर भी,
तू मुझमें है, यहीं रहता...
तुम्हारे बिन यहाँ जीना,
अब मुमकिन है, नहीं लगता...
तुम्हारे बिन मैं सांसें लूं,
ये मुमकिन है नहीं लगता...
जो अनसुना सा रह गया था,
प्यार का किस्सा...
फिर उसको सुन कभी पाऊं,
ये मुमकिन है नहीं लगता...
