उन सपनों पर विश्वास बहुत था,
जो मैं देखा करता था |
जिस दिन चली गई थी तुम,
मैं बस रोया करता था |
जाने किस देश चली गई हो,
ये बस सोचा करता था |
आज भी नैना रोंती हैं, उन नैनों को याद करके
उस कक्षा के बहाने
आज तुम,
फिर मुझसे मिलने आ जाओ |
उस दसवीं वाली कक्षा में
फिर पढ़ने का ज़ी करता है |
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