" बचपन की होली "





बचपन के वो खेल अनोखे,
मेरी वो मित्रों की टोली ।
कब से उसको ढूँढ रहा हूँ,
कहाँ गई बचपन की होली ?

रंग-भरी पिचकारी मेरी,
जाने किसने मुझसे ले ली... 
कब से उसको ढूँढ रहा हूँ,
कहाँ गई बचपन की होली ?

बर्फ़ीले पानी में रंग मिलाना,
मोहल्ले में किसी का बच न पाना । 
बंदूक से निकले पानी की गोली,
कब से उसको ढूँढ रहा हूँ...
कहाँ गई बचपन की होली ?

गुलाल से वो सबको रँगना,
शाम को सबसे पहले सजना । 
रसगुल्ले सी मीठी बोली,
कब से उसको ढूँढ रहा हूँ...
कहाँ गई बचपन की होली ?

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