" जाने कैसी जिद्द लिए बैठी है,
             आज तो मुझ से भी, पर्दा किये बैठी है
                      'इज़हार-ए-मोहब्बत' जाने कैसे , कब होगा...
                 अपने लबों पर ख़ामोशी का पहरा दिये बैठी है  |"

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