कुछ अनकही सी बातें...
"कुछ बातें अनकही सी, कुछ अनकही सी बातें... जो कह न सका था... अब कहना चाहता हूँ |"
"
जाने कैसी जिद्द लिए बैठी है,
आज तो मुझ से भी, पर्दा किये बैठी है
'इज़हार-ए-मोहब्बत' जाने कैसे , कब होगा...
अपने लबों पर ख़ामोशी का पहरा दिये बैठी है |
"
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